मशरूम की खेती कैसे की जाती है डिटेल में जानकारी

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मशरूम की खेती कैसे की जाती है डिटेल में जानकारी:-

आज हम जानेंगे कि मशरूम की खेती कैसे की जाती है वैसे तो मशरूम की खेती बहुत पहले से की जाती रही है परंतु भारत में इसका चलन 10 से 12 साल पहले से ही हुआ है इस व्यापार को हम कम से कम लागत में भी शुरू कर सकते हैं क्योंकि इसके के लिए हमें ज्यादा चीजों की आवश्यकता नहीं होती है इस व्यापार को हम अपने घर से भी शुरू कर सकते हैं इसमे हमें खेत की आवश्यकता नही होती है तथा इस व्यापार को कोई भी शुरू कर सकता है चाहे वह पढ़ा लिखा हो या अनपढ़ हो पहले लोगों का मानना था कि जो लोग पढ़े-लिखे नहीं होते हैं वही खेती का काम करते हैं पर समय के साथ-साथ लोगों की सोच में भी बदलाव आया है अब लोग पढ़ लिख कर भी नौकरी से ज्यादा अपने खुद का व्यापार करना पसंद करते हैं और इस बात को बहुत से लोगों ने सिद्ध भी करके दिखाया है उत्तराखंड की दिव्या रावत ने जिन्हें हम मशरूम गर्ल के नाम से भी जानते हैं उन्होंने अपनी अच्छी खासी नौकरी को छोड़कर मशरूम का बिजनेस शुरू किया तथा इसमें सफलता भी अर्जित की और आज लोगों के लिए मशरूम गर्ल के नाम से फेमस भी हैं इनसे प्रेरणा लेकर कई लोगों ने इसमें अपना हाथ आजमाया और सफलता भी पाई

मशरूम की खेती करना कोई कठिन कार्य नहीं है बस जरूरत है तो थोड़ी सही जानकारी की और मेहनत की जिसके माध्यम से आप भी इस बिजनेस में अपना हाथ आजमा सकते हैं तो आज हम आपको यही बताने वाले हैं कि मशरूम की खेती कैसे की जाती है इसका रखरखाव कैसे किया जाता है यह कितने प्रकार की होती है इसकी खेती से बहुत अच्छा लाभ होता है तथा इसका प्रयोग किन किन चीजों को बनाने में किया जाता है भारत में मशरूम की खेती मुख्य रूप से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना, हिमाचल तथा कर्नाटक जैसे राज्यों में मुख्य रूप से की जाती है

मशरूम के प्रकार:-

दनिया में मशरूम की लगभग 10,000 किस्मे मौजूद है परंतु भारत में इसकी केवल पांच किस्मे ही ज्यादा मशहूर है जो कि इस प्रकार है
(1) सफेद बटन मशरूम
(2) ढीगरी मशरूम
(3) दूधिया मशरूम
(4) शिटके के मशरूम
(5) पेडीस्ट्रॉ मशरूम

मशरूम का प्रयोग सिर्फ खाने तक ही सीमित नहीं है इसका प्रयोग कई तरह के दबावों में भी किया जाता है मशरूम से अचार, पापड़, एंटीड्रग, प्रोटीन शेक, मसाले और भी अनैको प्रकार से उपयोग में ली जाती है जिसके कारण इसकी मांग दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है इसका व्यापार भारत में ही नहीं विदेशों में भी बहुत ही उन्नत तरीके से किया जाता है विदेशों में तो इसकी मांग और भी ज्यादा है इसकी खेती से अच्छी खासी आमदनी होती हैI

सफेद बटन मशरूम:- भारत में पहले इस मशरूम की खेती निम्न तापमान में की जाती थी परंतु जैसे जैसे विज्ञान ने प्रगति की है वैसे वैसे वैसे तकनीक ने जन्म लिया है तव से किसी भी मौसम और तापमान में इसकी खेती की जा सकती है लेकिन उत्तरी भारत में इसकी मौसमी खेती करने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय ही उचित माना जाता है इसकी खेती के लिए अनुकूल तापमान 12 से 22 डिग्री सेंटीग्रेड अपेक्षित आद्रता 80 से 90% होनी चाहिए।
सफेद बटन मशरूम का उपयोग बहुत तरीके किया जाता है जैसे कि सलाद आदि यह एक खाद कवक होता है तथा यह बहुत ही स्पंजी भी होता है यह दिखने में मांस के जैसा होता है तथा इसका स्वाद भी कुछ-कुछ वैसा ही होता है इसलिए कई लोग इसे नॉनवेज मानते हैं जिसके कारण वो इसे खाना पसंद नहीं करते हैं परंतु यह एक शाकाहारी भोजन है यह मशरूम आसानी से हमें कहीं भी मिल जाता है सफेद मशरूम में प्रोटीन बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है यह हमारे शरीर मे से अतिरिक्त वसा और कोलेस्ट्रॉल को घटाने में हमारी मदद करता है सफेद मशरूम में कैल्शियम भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है इसके नियमित इस्तेमाल से हमारे शरीर में हड्डियों से संबंधित कई समस्याओं का निदान आसानी से होता है इसमें एरगोथियोनेइन नाम का एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होता है जो कि हमारे शरीर की प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करता है इसमें मौजूद प्राकृतिक इंसुलिन और एंजाइम्सम के कारण यह हमारे शरीर में मौजूद शर्करा और स्टार्च को तोड़ने में मदद करता है इसमें मौजूद फाइबर हमारी पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है जिससे कि हमें वजन घटाने में मदद मिलती है इसमें मौजूद कोपर खाने मे मौजूद आयरन को अवशोषित करता है तथा इसमें मौजूद आर्यन से हम अनीमिया से अपनी रक्षा कर सकते हैं इसमें मौजूद पोटैशियम हमारे शरीर के रक्तचाप को कम रखता है इसमें मौजूद वीटा ग्लूजकन प्रोस्टेट कैंसर के मामले में कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स अनुवांशिक बीमारियों के खतरे को कम करता है इसमें मौजूद विटामिन B2 लीवर के काम करने में मदद करता है और B5 हारमोंस को संतुलित रखता है इसमें मौजूद सेलेनियम से हड्डियों की सेहत में सुधार आता है और दांत बाल और नाखून मजबूत बनते हैं

ढीगरी या ऑस्टन मशरूम :-

इस मशरूम की खेती वर्ष भर की जा सकती है इस को उगाने में गेहूं व धान के भूसे का इस्तेमाल किया जाता है 2.5 से 3 महीने में यह तैयार होता है इस मशरूम की अलग-अलग प्राजातियों के लिए अलग-अलग तापमान की आवश्यकता होती है इसलिए यह मशरूम वर्ष भर उगाई जा सकती है इस मशरूम का उपयोग सूप तथा पाउडर बनाने में अधिक किया जाता है इसमें मौजूद प्रोटीन हमारे शरीर की प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है।

दूधिया मशरूम :-

इसको गर्मियों के मौसम में उगाया जाता है इसके कारण यह कर्नाटक,केरल, आंध्रप्रदेश तथा तमिलनाडु में अधिक मात्रा मे उगाया जाता है क्योंकि यहां की जलवायु इसकी खेती के लिए उपयुक्त होती है यह देखने में बड़ा आकर्षक होता है इसकी कृतिम खेती के होता है इसकी कृतिम खेती के रूप मे सबसे पहले शुरुआत पश्चिम बंगाल से शुरू हुई थी इसे गर्मी के मौसम में उगाने के कारण ये ग्रीष्मकालीन मशरूम के नाम से भी जाना जाता है इसको मैदानी इलाकों में उगाया जाता है इसकी खेती के लिए मार्च से लेकर अक्टूबर तक की जलवायु पर उपयुक्त होती है भारत में अभी दूधिया मशरूम का व्यवसाय इतना अधिक लोकप्रिय नहीं है इसके व्यवसाय को अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए अभी प्रयास चल रहे हैं इस मशरूम के भी कई फायदे हैं इस मशरूम में भी सभी प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो कि मानव शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक होते है

पेडीस्ट्रॉ मशरूम :-

दूधिया मशरूम की की तरह ही यह भी गर्म जलवायु में होने वाली खेती है इसको भी गर्म मशरूम के रूप में ही जाना जाता है इसमें स्वाद,मेहक, विटामिन,प्रोटीन, खनिज, लवण, तथा नाजुकता सभी का मिश्रण है जिसके कारण इसकी मांग बहुत अधिक मात्रा में है और इसके कारण से भारत में इसका व्यापार बहुत ही उन्नत है इसकी लोकप्रियता सफेद बटन मशरूम से कम नहीं आंकी जा सकती है यह भारत के गर्म जलवायु वाले प्रदेशों में ही इसकी खेती होती है जैसे कि उड़ीसा,तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश, झारखंड आदि अगर इसकी खेती को अनुकूल परिस्थितियों में किया जाए तो इसकी फसल को तैयार होने में सिर्फ 3 से 4 हफ्ते का समय ही लगता है इसको उगाने के लिए 28 से 35 डिग्री सेल्सियस ताप और 60 से 70% अद्रता की आवश्यकता पड़ती है भारत में इस मशरूम की मांग बहुत ही अधिक मात्रा में है तथा इसका व्यापार भी बहुत ही उन्नत है क्योंकि इसमें पर्याप्त मात्रा में सभी खनिज,लवण तथा विटामिन पाए जाते हैं जो कि मानव शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक होते हैं।
शिताके मशरूम :- यह मशरूम और मशरूम के मुकाबले ज्यादा उपयोगी है यह बटन मशरूम से भी ज्यादा स्वादिष्ट व उपयोगी है स्वाद और उपयोगिता के आधार पर यह बहुत ही कीमती मशरूम है इस मशरूम में सभी विटामिन भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं इसमें विटामिन B2 खासतौर पर पाया जाता है इस मशरूम का उपयोग बहुत सी दवाओं में किया जाता है तथा इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है इस मशरूम को जापानी मशरूम के नाम से भी जाना जाता है इस मशरूम में बसा तथा शर्करा नहीं होता है जिसके कारण यह डायबिटीज और हृदय रोगियों के लिए बहुत ही उपयोगी तथा फायदेमंद है यह मशरूम बहुत ही गर्म होता है जिसके कारण गर्भवती महिलाओं को इसको ना खाने की सलाह दी जाती है इसके उपयोग से हमारे शरीर का कोलेस्ट्रोल घटता है साथ ही हमारा इम्युनिटि सिस्टम भी मजबूत होता है जिसके कारण हमे अन्य रोगो से लड़ने की ताकत मिलती है इस मशरूम को साल सागवान और भारतीय किन्नू वृक्ष की भूसी पर

आसानी से उगा सकते हैं यह मशरूम की एक ऐसी प्रजाति है जो कि कैंसर एड्स जैसी खतरनाक बीमारियों से भी रक्षा करती है यह स्टमक और कोलस्ट्रोल कैंसर में ही बहुत उपयोगी होती है यह मशरूम कैंसर की दवाई लेटाइनन का मुख्य स्रोत है इस मशरूम का उपयोग बढ़ती उम्र के निशान रोकने के लिए भी किया जाता है यह मशरूम मार्केट मे मुख्यता तीन रूप मे मिलता है ताजा,सूखा तथा सीटाके एक्सट्रैक्ट की दवा और आहार पूरक के रूप में

मशरूम की खेती के लिए आवश्यक सामग्री :

मशरूम की खेती के लिए मुख्य रूप से सिर्फ 5 से 6 चीजों की ही आवश्यकता होती है तथा अगर हम इसका उपयोग सही मात्रा में और सही ढंग से करें तो हमें इसके काफी अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं
(1) भूसा
(2) पॉलीबैग
(3) कार्वेडाजिम
(4)फर्मेलिन
(5) बंद कमरा

(6) बीज

मशरूम की खेती के लिए आवश्यक तत्व हैं भूसा
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि भूसा बारिश से भीगा ना हो और भूसा कटा हुआ बारीक न हो तो पहले उसे बारीक काटे उसके पश्चात भूसा को धोया जाता है इसके लिए भूसे को बोरियों में भरकर बड़े-बड़े ड्रमो में डालकर गर्म पानी से धोया जाता है इसे 10 से 12 घंटे तक उसमें ही रखा जाता है इसके पश्चात उसे निकाल कर किसी टाट पर बंद बोरो मे ही रख दिया जाता है ताकि उनका अतिरिक्त पानी निकल जाए इसके पश्चात इन बोरो के मुंह खोल दिए जाते हैं और भूसे को अच्छी साफ जगह पर फैलाया दिया जाता है जिससे कि उसका सारा पानी सूख जाए अब हमें भूसे को अपने हाथ में लेकर देखना है कि भूसे में बस थोड़ी ही नामी हो और उस से पानी ना निकल रहा हो तो मान लो अब यह भूसा मशरूम की खेती के लिए तैयार है इस पूरी प्रक्रिया को करने से भूसे की सारी गंदगी निकल जाती है जिससे कि मशरूम अच्छी तरह से उग(ग्रो)पाती हैं जब भूसे को पानी में भिगोया जाता है तब उसमें फार्मानिन मिलाया जाता है जिससे कि भूसे की अशुद्धता दूर हो जाए
भूसे सुखाने के पश्चात अब बारी है बीजों की बुवाई की इसके लिए हमें एक 16 बाई 18 साइज के पॉलिथीन बैग लेने होंगे
अब हम बीजों को रोपने का काम शुरू करेंगे यह 2 तरह से होता है नंबर एक तो भूसे में बीजों को एक साथ मिलाकर
दूसरा :- परत दर परत बीजों को डालकर
इसके लिए पहले पॉलिथीन में भूसा डालिए उसके बाद इसमें बीजों को फैलाएं फिर उसके ऊपर भूसा डालें उसके बाद फिर बीजों को फैलाये इसमे भूसे की परत एक इन्च मोती होना चाहिए इस तरह फिर दोबारा इसमें बीज डाला जाएगा उसके पश्चात भूसे को हाथों से अच्छी तरह से दबाया जाए ताकि उसमें हवा ना रह पाए इसके बाद बैग का मुंह अच्छी तरह से बंद कर दें तथा बैक में नीचे की तरफ दो छेद कर दें जिससे कि भूसे का अतिरिक्त पानी निकल जाए अब इन बैगो को ऐसी जगह पर रखना है यहां पर हवा ना लगे बेगो का रखरखाव बहुत ही आवश्यक है अगर हमने इनकी देखरेख ठीक से नहीं की तो हमारी सारी मेहनत और फसल खराब भी हो सकती है इसके लिए हमें एक बंद कमरे को आवश्यकता होती जिससे हवा बेगो मे ना जा सके तथा बैगों को टांगने के लिए भी रस्सियों का या लोहे की जाली नुमा बॉक्स का भी इस्तेमाल किया जा सकता है इन बैगों को टांगने के बाद हम कमरे को पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए और जब 24 घंटे के बाद जब हम कमरा खोलेंगे तो इसमें हल्के हल्के पानी का छिडकाव भी करना पड़ता है इसके बाद यह फसल 30 से 40 दिनों में लगभग तैयार हो जाती है।
मशरूम की खेती का प्रशिक्षण केंद्र मशरूम की खेती के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए हमारे देश में ऐसे बहुत से विश्वविद्यालय और कृषि विद्यालय है जो कि इसकी पूरी जानकारी आप को देते हैं इसके अलावा आपको इसकी अतिरिक्त जानकारी अपने शहर के कृषि सहायता केंद्र से भी प्राप्त हो जाती है विज्ञान केंद्र में आपको इसको खेती के लिए 14 दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा इसके बाद आपको सर्टिफिकेट भी दिया जाता है साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र आपको भारत सरकार द्वारा इसकी खेती में दी जाने वाली सारी जानकारी भी देती है तथा आपके सारे दस्तावेज बनाने में भी मदद करती है ।

मशरूम को मार्केट में कैसे बेचे:-

मशरूम एक ऐसी फसल है जो कि जल्दी ही खराब होने लगती है इसके लिए हमें चाहिए कि हम इसे जल्द से जल्द बाजार में जाकर बेच दें क्योंकि बहुत जल्दी खराब होने लगता है जिसके बाद यह किसी काम का नहीं रहता है तो हमें इसको नजदीक शहर में जाकर जल्द से जल्द बेचना चाहिए या फिर हम कुछ लोगों को भी इसके काम में लगा सकते हैं जो इसे गांव गांव में जा कर बेचे या फिर किसी बड़ी कंपनी से हम इसके लिए कॉन्ट्रैक्ट कर लेना चाहिए जिससे इसको बेचने मे कोई प्रॉब्लम ना हो साथ ही अगर हम चाहे तो इसके अचार, पापड़, चटनी सूप आदि बनाकर भी इसको दुकानों में बेच सकते हैं।

मशरूम की खेती से लाभ:-

इसकी खेती में मुनाफा बहुत होता है क्योंकि इसमें बहुत ही कम सामग्री का उपयोग होता है साथ ही इसके उगाने के लिए हमे किसी बड़ी जगह की आवश्यकता नहीं होती है इसकी खेती अगर हम अपने घर से ही कर रहे हैं तो हमें मुनाफा भी ज्यादा ही होगा क्योंकि इसमे हमें बहुत ही कम लागत लगानी पड़ेगी है उम्मीद है आपको हमारे लेख पसंद आया होगा तो इसे शेयर अवश्य करें
धन्यवाद जय हिंद जय भारत

 

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